गुरुवार, 31 दिसंबर 2015

प्रेम -२५

कैसे लिखु
कि तुम पढ़ सको,
कैसे पढू
कि तुम सुन सको
कैसे व्यक्त करू
कि तुम समझ सको ,
क्या बनाऊ
कोई चित्र
या कोई मूर्ति
या सजाऊ घर
कि तुम चकित हो जाओ
कि ये मेरा ही हैं,
प्रेम
बिल्कुल कोरा कोरा,
ईजल पर के केनवास के जेसा.