“ लौटना ”
मैं आज फिर लौट आया हूँ
हर बार की तरह,
इस बार भी खाली हाथ
बिना कोई उपहार लिए,
वह चाहे जितना भला बुरा कह ले
पर नहीं ला पाता मैं कुछ भी,
खरीद कर.
मैं बस उपस्थित हो जाता हूँ
जैसे उपस्थित होते सभी ग्रह, नक्षत्र और तारे
बिना किसी चुक के एक पल भी.