बुधवार, 5 मार्च 2008
सोमवार, 3 मार्च 2008
पर्रिवतन 1
आस्था में पर्रिवतन,
प्रतीकों का स्थानंतरण,
हो रहा हैं तेज गति से
क्या यह सत्य हैं
तुम कोई भी व्यवहार मन से नही ,
मस्ितष्क से करते हो
स्पष्ट दिखाई देता है
एक नया अजीबो गरीब
बनाया नया संसार ।
प्रतीकों का स्थानंतरण,
हो रहा हैं तेज गति से
क्या यह सत्य हैं
तुम कोई भी व्यवहार मन से नही ,
मस्ितष्क से करते हो
स्पष्ट दिखाई देता है
एक नया अजीबो गरीब
बनाया नया संसार ।
रविवार, 2 मार्च 2008
अपने बारे मे्
मेरा नाम मयंक तिवारी हैंा मैंने Regional Instutite Of education ( NCERT-NEW Delhi) Bhopal से Post Graduate Diploma in Guidance and Counselling किया हैा इसके पहले DAVV -Indore से Psychology मे M.A. की डीग्री ली हैा दोनो पर मेरा दुसरा Rankरहा हैं ा बाकि आगे की कडीयों मे वैसे भी हमारे यहॉ कहावत है पुत के पाव पालने में ही दिख जाते हैा
अपनी पेदाइश राजा भोज के नगर मे वो भी दत्तु बॉ के मकान मे हुई है बचपन से ही नबंर-१ रहे है,भले ही पीछे से ही सही , पालन-पोषण अपने ननिहाल मतलब धार मे हुआ, पढाई-लिखाई १२ वी तक तो धार मे ही हुई फिर अपने को अपने विकास की सुझी तो अपन इंदौर आ गये ,गलती से पढने-लिखने का शौक अभी तक बरकरार है, पेट भरा ही नही वरना छोड चुके होते फिर भी अकादमिक रुप से ५ साल विधीवत रुप मनोविज्ञान की पढाई-लिखाई की औरु युनिवरसिटी मे दुसरे स्थान से बाहर हो गये साथ साथ बहुत कुछ और भी कीया , इंदिरा गॉधी से सृजनात्मक लेखन मे डिप्लोमा भी कर लीया , इंदौरयुनिवरसिटी से ही योग में सटिर्फिकेट तथा डिप्लोमाभी कर लिया है , अभी तत्काल मे वेद निपुण की दीक्षा ले रहे है,शौक बहुत है, या यु कहें कि अपन पुरे के पुरे शौकिया शक़्स है, लिखना -पढना तो है ही, नाटक -नौटंकी भी साथ ही लगे लगे है , अपन मूलरुप से शास्त्रीयता प्रेमी है,अपन को जरा सी भी भुल्-चूक पसंद नही है, संज्ञान मनोविज्ञान , योग, दर्शन , संगीत ,गाडी पर घुमना दिन- भर चटर-पटर खाना अपने जन्म से अधिकार मानते है , जीविकोपाज की भी सोचने लगे है ,सबसे पहले धनयवाद अपने मामाजी को ( अतुल शर्मा ) जिन्होने अपने को इस ब्लागर दुनिया के बारे में चेताया वरना अपन तो नीरे के नीरे ही रह जाते अपन ने उसी क्षण ठान ली कि अपन भी कुछ जरुर करेगे , और बना डाला उनके ही निर्देशन में ब्लाग , अपनी भाषा तो शुध्द है पर बिना फ्रेम में कसी पेंटिग का मजा ही कुछ और होता है वैसे ही बिना लाग लपेट के अपने बारे में लिखने का मजा ही कुछ और होता है,चुकि अपने शौक बहुत है , इसलिए अपने पास सभी विषयों पर पेंन घसिटने की आदत है , वो अपन पक्के करेगें,तो फिर से सभी ब्लागर भाईयों को धन्यवाद जिन्होने इस महान दुनिया का निर्माण किया , आशा करता आप अपनी प्रतिक्रिया से तथा भाषा संबंधी योग्यता से परिचित करायेगे ,
सधन्यवाद
अपनी पेदाइश राजा भोज के नगर मे वो भी दत्तु बॉ के मकान मे हुई है बचपन से ही नबंर-१ रहे है,भले ही पीछे से ही सही , पालन-पोषण अपने ननिहाल मतलब धार मे हुआ, पढाई-लिखाई १२ वी तक तो धार मे ही हुई फिर अपने को अपने विकास की सुझी तो अपन इंदौर आ गये ,गलती से पढने-लिखने का शौक अभी तक बरकरार है, पेट भरा ही नही वरना छोड चुके होते फिर भी अकादमिक रुप से ५ साल विधीवत रुप मनोविज्ञान की पढाई-लिखाई की औरु युनिवरसिटी मे दुसरे स्थान से बाहर हो गये साथ साथ बहुत कुछ और भी कीया , इंदिरा गॉधी से सृजनात्मक लेखन मे डिप्लोमा भी कर लीया , इंदौरयुनिवरसिटी से ही योग में सटिर्फिकेट तथा डिप्लोमाभी कर लिया है , अभी तत्काल मे वेद निपुण की दीक्षा ले रहे है,शौक बहुत है, या यु कहें कि अपन पुरे के पुरे शौकिया शक़्स है, लिखना -पढना तो है ही, नाटक -नौटंकी भी साथ ही लगे लगे है , अपन मूलरुप से शास्त्रीयता प्रेमी है,अपन को जरा सी भी भुल्-चूक पसंद नही है, संज्ञान मनोविज्ञान , योग, दर्शन , संगीत ,गाडी पर घुमना दिन- भर चटर-पटर खाना अपने जन्म से अधिकार मानते है , जीविकोपाज की भी सोचने लगे है ,सबसे पहले धनयवाद अपने मामाजी को ( अतुल शर्मा ) जिन्होने अपने को इस ब्लागर दुनिया के बारे में चेताया वरना अपन तो नीरे के नीरे ही रह जाते अपन ने उसी क्षण ठान ली कि अपन भी कुछ जरुर करेगे , और बना डाला उनके ही निर्देशन में ब्लाग , अपनी भाषा तो शुध्द है पर बिना फ्रेम में कसी पेंटिग का मजा ही कुछ और होता है वैसे ही बिना लाग लपेट के अपने बारे में लिखने का मजा ही कुछ और होता है,चुकि अपने शौक बहुत है , इसलिए अपने पास सभी विषयों पर पेंन घसिटने की आदत है , वो अपन पक्के करेगें,तो फिर से सभी ब्लागर भाईयों को धन्यवाद जिन्होने इस महान दुनिया का निर्माण किया , आशा करता आप अपनी प्रतिक्रिया से तथा भाषा संबंधी योग्यता से परिचित करायेगे ,
सधन्यवाद
सदस्यता लें
संदेश (Atom)