“सपुर्दे –खाक”
(कलाम साहब को अंतिम श्रद्धांजलि)
जब आखें कुछ भी ना
बोले
और
तुम कुछ पक्तियां
पड़ो
और आखें चुप चाप ही
गीली हो जाये
तुम कुछ याद करो और
गर्व से सीना चौड़ा हो जाये
तुम कुछ याद करो और
सच में शरीर के रोयें कपकपाने लगे
और तुम कुछ समय के
लिए जड़ हो जा ओ
क्या हो रहा हैं !
कुछ नहीं
एक देश का
राष्ट्रपति,
नहीं,
एक महान वैज्ञानिक,
नहीं,
एक बहुत अच्छा
इन्सान,
नहीं,
एक बहुत अच्छा
"शिक्षक"
सपुर्दे -खाक हो रहा
हैं.

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