जब भी लिखा जायेगा
इस सदी का
प्रेम इतिहास
उसमे में भी हम पंक्ति में
सबसे पीछे ही लगेगें
जैसे सीढीयों पर भी
सबसे नीचे की सीढी पर बैठते थे हम
देखते हुए एकटक चकोर चन्द्रमा को
क्या सोचता होगा
जैसे मैं भी अभी नहीं
सोच पा रहा हूँ कुछ भी
क्या अमृत ! कुछ होता भी होगा
या बस ये तुम्हारी
आखों में छुपे
समुद्र सा अनादी अनंत हैं
कितना बोलती हैं
कितना सुनती
हैं
तुम्हारी आखें
अनवरत प्रतीक्षा करते हुए
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