इस बार का सावन
भी तुम्हारे नाम क्या कर सकता हूं
बिना पूछें तुम से,
जैसे हर बार के सावन किये हैं
आज तक,
तुम्हारे अज्ञात मैं भी
बहुत कुछ तुम्हारा
या
सब कुछ तुम्हारा
वैसे के वैसा ही रख छोड़ा हैं मैंने आज तक,
जैसे हर बार का सावन
किये देता हूँ तुम्हारे नाम.
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें