मंगलवार, 29 जुलाई 2008

चौराहे की मूर्ति

राहों को बाँटता है
चौराहा
चौराहे पर मूर्ति
खड़ी मूर्ति
या फिर
बैठी
आधी या फिर
पूरी मूर्ति
अचेत सी खड़ी
मूर्ति/बैठी मूर्ति
चौराहे पर नज़र रखे मूर्ति
देखा क्या-क्या नहीं
इस मूर्ति ने
दंगे हो या
मारी-मारी
कर्फ़्यू हो या
बीच सड़क पर
किसी को लुटते
लाचारों के साथ होता
दुराचार
या फिर
किसी को घर से बेघर होते
बेघर हुए कुछ
शरीरों को शरण
भी दी है इसने
पर बहुत कम समय के लिए
चुपचाप
मौन खड़ी या मौन बैठी मूर्ति
मौन है
इसके निर्माण से अब तक
इसका मौन ही बोलता है
चिल्लाता है,
किसी जाते हुए जुलुस में नारे भी लगाता है,
क्योकि यह मूर्ति प्रतीक है
हमारे कुछ न कह पाने की
मौन में
खड़ी या फिर बैठी मूर्ति
हर चौराहे पर
मूर्ति
मौन मूर्ति

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