मंगलवार, 29 जुलाई 2008

घर

एक जगह से दूसरी जगह
भागते हुए और
भगाते हुए भी
किसी क्षण यह अहसास नहीं होता
कि बेघर हो गए
वरन्‌ स्थानांतरण का एक अलौकिक अनुभव वह
राजमार्ग से चार हाथ दूर बना वह
घर हाँ, उसमें नहीं है कोई भेद
नहीं है कोई निश्चित दीवार
जिस पर नहीं टाँगी जा सके कोई लैंडस्केप तस्वीर
रखने की जगह नहीं है कोई फूलदान
फूलदान जरूर हम बनाते हैं
उसमें नहीं है कोई भी समान जिसकी
चिंता में घर न सूना छोड़ा जा सके
इसे बनाने में किसी वास्तुशास्त्री की जरूरत नहीं पड़ी
न ही इसे सजाया है किसी इंटीरियर डेकोरेटर ने
शासकीय तौर पर यह अवैध है
पर तुम्हें बता दूँ यह घर है
जिसमें शाम को मजूरी पर से आकर
बाजरे के रोटले खा कर
राजमार्ग से चार हाथ दूर पड़ी खाट
पर सो जाता हूँ निश्चिंत
हाँ बिल्कुल निश्चिंत होकर
राजमार्ग से चार हाथ दूर यह
घर है मेरा
उठने के लिए अगली सुबह
और वापिस लौटने के लिए घर पर
यायावरी करते हुए हो गया है
अब बहुत समय

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