जब लिखा जाएगा
इस सदी का इतिहास
तब शायद न बची हो कोई भी जमीन रिक्त
जिस पर खेलते हो बच्चे
गिल्ली-डंडा या फिर कंचे
न उड़ती होगी पंतगें उतनी
जितनी बचपन में मैंने देखी हैं
तब-जब बच्चों से उनका
बचपन छिन जाएगा
सब तरफ जब केवल वैश्विकरण छा जाएगा
न कर सकेगें बात हम
मौलिक चितंन कि जब
हर वाक्य मानसिक गुलामी का द्योतक बन जाएगा
तब कविता फालतू मानी जाने लगेगी
तब शायद
न रह जायेगा इस सदी में कुछ तलाशने को
तब तुम
कम्प्यूटर पर बैठ कर लिखना
इस सदी की कविता
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