मंगलवार, 29 जुलाई 2008

दो सड़कों के बीच

दो सड़कों के बीच
खड़ा कबीरा, देता रह गया सीख
कोई न जाने
कोई न माने
सब हो गयी पुरानी रीत
बँटता जा रहा पूरा संसार
दो सड़कों के बीच
खड़ा कबीरा, देता रह गया सीख
आप ही गाना
और आप ही बजाना
अपनी ही धुन पर चाहे सबको नचाना
ऐसी ही हो गई आजकल की नीत
दो सड़कों के बीच
खड़ा कबीरा, देता रह गया सीख
क्या घर
क्या बाजार बचा
होठों की मुस्कानों पर कौन सा - सौदा सजा
बहुत लगाई जुगत अब की बार
पर नहीं बचा
दो सड़कों के बीच
खड़ा कबीरा, देता रह गया सीख
इस ओर रोज दीवाली हैं
हर रोज प्याला होता खाली है
उस ओर भी दीवाली
वहाँ हर रोज होती मैय्यत की तैयारी है
भूख से, बीमारी से
या दुर्घटना से
दो सड़कों के बीच
खड़ा कबीरा, देता रह गया सीख
भोगवाद भी अंधी - आँधी
कौन कहेगा - जय गाँधी
बाकी की तो कोई स्मृति नहीं रही कोई विषेष
यह कौन सा देश
दो सड़कों के बीच
खड़ा कबीरा, देता रह गया सीख

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