मंगलवार, 29 जुलाई 2008

विरासत

मुझे विरासत में क्या मिला
बस दो गज जमीन
और आधी टूटी हुई तलवार
तुमने दो गज जमीन
पर भी खींच दी दीवार
और उस पर अपने
शौर्य गाथा के परचे चिपका दिये
क्या मिला उस पर भी उन लोगों को
थमा दी आधी टूटी तलवार
केवल यह कहकर,
यदि कोई दीवार के
इस पार से झाँके भी तो
उतार देना उसके पार
दीवार क्या थी
बस! दो गज जमीन पर बनी दीवार
दो संप्रदायो के बीच की दीवार
यह जानने के बावजूद
दीवार से दीवार सटी हुई है
जाने कितनी दीवारें बनी हुई हैं
अब भी बनने को हैं युद्धरत
इनका पतन होगा भी नहीं
शायद और शायद कोई नहीं जानता
दीवारें खण्ड-खण् हो गई हैं
इतना लघु रूप धारण
कर लिया है इन्होंने
युद्धों की शौर्य गाथाओं में
बँट-बँट कर
ये मेरी विरासत है
मेरी विरासत भी दीवार
गर्व करूँ!
या लज्जा से मस्तक नीचा
क्या बस यही था मेरा भूतकाल
जो भविष्य बनने को है
मुझे भी क्या यही देना है
विरासत अगली पीढ़ी को
मुझे विरासत में क्या मिला
बस! दो गज जमीन और आधी टूटी - तलवार

2 टिप्‍पणियां:

परमजीत सिहँ बाली ने कहा…

कविता के भाव बहुत सुन्दर हैं।बहुत बढिया!
दिशाएं

Unknown ने कहा…

धन्यवाद।